इस ज़िन्दगी से क्या मिला क्या ना मिला,
इस ज़िन्दगी को क्या दिया क्या ना दिया ,
क्या कहें मगर, जैसा भी है सफ़र ...........
कुछ भी नहीं हमें, इसका शिकवा गिला....
इस जिंदगी से क्या मिला......................
क्या कहूँ क्यों भीड़ में, तनहा सा रहता हूँ,
फिर भी मुस्काकर यहाँ, हर बात कहता हूँ
ना जाने कब से चल रहा ये सिलसिला .......
इस ज़िन्दगी से क्या मिला......................
पाँव धरती पर, फलक पर हाथ हैं मेरे,
दुआओं के बहुत से काफिले भी, साथ हैं मेरे,
मुझको अपना क्यों लगा, जो भी मिला.....,
इस ज़िन्दगी से क्या मिला......................
इस ज़िन्दगी को क्या दिया क्या ना दिया ,
क्या कहें मगर, जैसा भी है सफ़र ...........
कुछ भी नहीं हमें, इसका शिकवा गिला....
इस जिंदगी से क्या मिला......................
क्या कहूँ क्यों भीड़ में, तनहा सा रहता हूँ,
फिर भी मुस्काकर यहाँ, हर बात कहता हूँ
ना जाने कब से चल रहा ये सिलसिला .......
इस ज़िन्दगी से क्या मिला......................
पाँव धरती पर, फलक पर हाथ हैं मेरे,
दुआओं के बहुत से काफिले भी, साथ हैं मेरे,
मुझको अपना क्यों लगा, जो भी मिला.....,
इस ज़िन्दगी से क्या मिला......................
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