बुधवार, 14 मार्च 2012

फिर से लेकिन वो मसीहा खो न जाये देखना..!

आज जो अपना है कल वो खो न जाये देखना,
जिसका डर है हादसा फिर हो न जाये देखना.!

हमने कुछ विश्वास के,,, पौधे लगाये थे जहां
कोई शंकाओं के कांटे,, बो न जाये देखना....!

आजकल तालाब क्या नदियाँ भी गन्दी हो गयीं
बादलों का जल भी मैला,,, हो न जाये देखना...!


हमने हँसते खेलते,,,,,, आंसू छुपाए हैं सदा
सोचकर इस दर्द को वो रो न जाये देखना...!!

इक सदी के बाद वो,, दीपक लिए लौटा तो है
फिर से लेकिन वो मसीहा खो न जाये देखना..!

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